मिलिए देश की पहली मारुती 800 से

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First-Maruti-800-with-owner-720x540मारुती सुजुकी 800 …हाँ ये वही कार है जिसने हिन्दुस्तानी कार मार्केट में एक हरकंप जैसा मचा दिया था.एक कार की क्रांति का जन्म हुआ.शायद जितना सफल हिन्दुस्तानी मार्केट में मारुती सुजुकी 800 रहा है उतनी सफल कोई गाड़ी हुई नहीं.लगभग 28 साल हो गए हैं मारुती को आये हुए बाज़ार में, हालांकि अब मारुती सुजुकी 800 का निर्माण बंद कर दिया है मारुती कंपनी वालों ने.लेकिन मारुती सुजुकी 800 का 28 सालों का गौरवशाली इतिहास रहा है.

80 के दशक में, जब करें खरीदना एक कठिन काम था, सभी कारें महंगी थी..उसी समय मारुती सुजुकी 800 बाज़ार में आयीं.इसके बाज़ार में आते ही कितने लोगों का कार में सफ़र करने का सपना सच हुआ.इसका पूरा श्रेय जाता है मारुती सुजुकी 800 के बेहद ही सुन्दर डिजाईन और इसके दाम को. अन्य कारों के मुकाबले ये सस्ती कार हुआ करती थी उस समय लेकिन फिर भी इसके बेहद ही आकर्षक डिजाईन ने हर वर्ग के लोगों को अपनी ओर खिंचा.

मैं अपनी ही बात बताता हूँ, मुझे मारुती सुजुकी 800 बेहद पसंद है, इसलिए नहीं की ये सस्ती है, पर इसलिए भी की ये बेहतर गाड़ी है.डिजाईन के मामले में भी ये आकर्षक है, और चलती भी अच्छी है.किफायती भी है.हर तरह से एक मध्यम-वर्गीय परिवार के लिए अनुकूल गाड़ी .

हरपाल सिंह और गुलशन्बीर कौर, देश के पहले मारुती सुजुकी 800 के गर्वित मालिक हैं. हरपाल सिंह ने 14 दिसंबर 1983 को मारुती सुजुकी 800 ख़रीदा था.  प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा उन्होंने गाड़ी की चाबी प्राप्त की.ये दिन 14 दिसंबर “माई कार डे ” के रूप में भी मनाया जाता है.उस समय उन्होंने मारुती सुजुकी 800 को 47000 रुपये में ख़रीदा था.
हरपाल सिंह का ये मानना है की ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है की मारुती वालों ने मारुती सुजुकी 800 का निर्माण अब बंद कर दिया है.उनके साथ मेरा भी यही मानना है की मारुती वालों को मारुती सुजुकी 800 को बंद नहीं करना चाहिए.
खैर अब जो भी हो, हरपाल सिंह ने अपनी पहली मारुती 800 को बेचने का दिल बना लिया है, उनका कहना है की अगर कोई उनकी मारुती के सही दाम देने को राज़ी होते हैं, तो वो जरूर मारुती 800 को बेच देंगे.

अब देखते हैं कितने लोग बोली लगते हैं देश के पहले मारुती 800 का…

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